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Solution to End Freebies and Populism - मुफ्तखोरी और लोकलुभावनवाद को समाप्त करने का समाधान।

Reason/कारण: Why do politicians of all parties in India offer freebies and populist promises? Let's first understand that. The very simple and straightforward answer to this question is that, they do this to get vote with an intention to takeover the powers to rule on public. Their primary intention behind giving freebies and populist promises is NOT public interest at all. Rather, once they have the powers in hand, they know how to take advantage of those powers. They know, how to recover back the cost of freebies by using their powers. So in short, this is a game of offering for free, and then taking the delivered freebies back from public, through various other different forms of tactics. So indirectly speaking, the public actually doesn't get anything for free. It's just their imagination that, "oh! the Government is so nice. They gave it me for free. So, I will vote for same government in return". That's the point how the politicians play with public, by offering them the freebies and populist promises.

भारत में सभी पार्टियों के राजनेता मुफ्त का माल और लोकलुभावन वादे क्यों करते हैं? आइए पहले इसे समझते हैं। इस प्रश्न का बहुत ही सरल और सीधा-सा जवाब है कि, वे जनता पर शासन करने की शक्तियाँ हथियाने के इरादे से वोट पाने के लिए ऐसा करते हैं। मुफ्त का माल और लोकलुभावन वादे देने के पीछे उनका प्राथमिक उद्देश्य जनहित कतई नहीं है। बल्कि, एक बार जब उनके हाथ में शक्तियाँ आ जाती हैं, तो वे जानते हैं कि उन शक्तियों का लाभ कैसे उठाया जाए। वे जानते हैं कि अपनी शक्तियों का उपयोग करके, मुफ्त में दिए हुए माल की कीमत को कैसे वापस वसूल करना है। संक्षेप में बोलूं तो, मुफ्त का माल वाली पेशकश सिर्फ एक खेल है, और फिर विभिन्न प्रकार की युक्तियों से, मुफ्त में दिए हुए माल की कीमत, वापिस जनता से कैसे वसूल करना, ये भी वो लोग अच्छे से जानते है। असल में देखा जाए तो, जनता को वास्तव में मुफ्त में कुछ भी नहीं मिलता है। यह उनकी कल्पना मात्र है कि, ओह! सरकार बहुत अच्छी है। उन्होंने मुझे मुफ्त में दे दिया। इसलिए, मैं बदले में उसी सरकार को वोट दूंगा। मुद्दे की बात ये है, की मुफ्त वितरण और लोकलुभावन वादों के जरिए, राजनेता सिर्फ और सिर्फ जनता को बेवकूफ बनाते है। और जनता मुफ्त का हासिल करके, पूरे देश की हालत श्रीलंका जैसी करने पर तुली हुई है। जनता भी तो कम नही। मुफ्त लेने वाली जनता अंधी है क्या? क्या मुफ्त का माल खाने वाली बेवकूफ जनता को दिखता नहीं, की श्रीलंका और पाकिस्तान का क्या हाल हुआ है? जनता मांगती है मुफ्त, तभी तो नेता देते है मुफ्त। तो सारा इल्जाम नेताओं पर ही क्यों लगाए? मुफ्त का माल खाने वाली जनता को भी समझना पड़ेगा

Solution/समाधान: Below are the solutions which can save country and citizens both. नीचे दिए गए समाधानों से देश को और देशवासियों को बचाया जा सकता है।

 

  1. Election Commission needs to create a clearly stating law. Niether freebie promises can be given before elections, nor the actual material be delivered for free after the elections. Otherwise country resources and treasury, both will get empty. चुनाव आयोग को एक सख्त कानून बनाना होगा, जिसके अनुसार कोई भी नेता चुनावों से पहले, मुफ्त वितरण या लोक लुभावन वादे नहीं कर सकता है। यहां तक की, चुनावों को जितने के बाद भी, किसी भी प्रकार की मुफ्त बंदर-बांट नही कर सकता। वरना देश का सारा माल और खज़ाना, दोनो ही खाली हो जायेगा।
  2. The government in power can only deliver for free in critically emergency situations. Such as for example: Ukraine War Situations, COVID-19 Lockdown Situations, etc. In other normal situations, any government should not have powers to promise and/or deliver freebies. जो भी सरकार पावर में हो, वो मुफ्त वितरण सिर्फ तभी कर सकती है, जब अत्यंत गंभीर आपातकालीन परिस्थितियां पैदा हो जाए। उदाहरण के तौर पर, यूक्रेन युद्ध जैसी परिस्थितियां, या कोरोना लॉकडाउन वाली परिस्थितियां। अन्य किसी भी मामूली परिस्थिति में, कोई भी सरकार मुफ्त वितरण करने का, या मुफ्त वितरण का वादा करने का, अधिकार नहीं रख सकती। 
  3. In the case when government gives anything for free to public, it should be under the condition, that the receiver needs to return the received freebie back in a particular timeframe. I mean, "Interest Free Return of What Public Received From Government Within a Particular Timeframe". This type of policy is required in the country. अगर किसी गंभीर कारणवश, सरकार जनता को मुफ्त वितरण करती है, तो उस मुफ्त वितरण को कुछ शर्तो पर दिया जाना चाहिए। शर्त ये होनी चाहिए, की सरकार जो कुछ भी मुफ्त देती है, वो बिना ब्याज के सरकार को लौटाना होगा, और उसके लिए एक निर्धारित समय सीमा होनी चाहिए। उदाहरण के लिए मान लीजिए, की मैं एक किसान हूं। और सूखे या बाढ़ के कारण मेरे घर में खाने को एक दाना भी नही है। तो ऐसी विकट परिस्थिति में, सरकार मेरी सहायता कर सकती है। सरकार का सहायता करने का तरीका ऐसा होने चाहिए: अगर सरकार 5 महीनों तक मुझे 10 किलो अनाज प्रतिमाह देती है, तो वो 50 किलो मुफ्त अनाज की मदद जो मुझे सरकार से मिली हैं, वो मुझे बिना ब्याज के सरकार को अगले 1 से 2 साल के भीतर लौटाना होगा। चाहे वस्तु (अनाज) के रूप में लौटाई जाए, चाहे उसकी कीमत लौटाई जाए। वो नियम सरकार तय करे। पर वापस तो लौटाना ही होगा। बिना ब्याज के असल को लौटाने के लिए, एक-दो साल का समय कम नही होता। इतने समय में तो गरीब किसान भी आसानी से लौटा सकता है। उसको कौनसा ब्याज देना है? असल ही तो लौटाना है। ऐसी पॉलिसी बनानी होगी सरकार को। कब तक मुफ्त बंदर बांट करोगे? बूंद बूंद से अगर समंदर भर सकता है, तो बूंद बूंद से खाली भी तो हो सकता है

Who is Responsible/जिम्मेदार कौन? You, me, politician, public, we all are responsible. Still it's not late, every Indian please try and understand. Little Struggle and Small Problem is Better Than Complete Destruction. तुम भी, मैं भी, नेता भी, जनता भी, हम सब दोषी है। पर अभी भी देर नहीं हुई। सारे भारतीय मिलकर बात को समझो, थोड़ा कष्ट, संपूर्ण विनाश से बेहतर होता है

NOTE: I am transmitting this message throughout my "VVIP NATIONAL PRIVATE MESSAGING NETWORK" across India. Keep forwarding across your entire contact database on your mobile. इस संदेश को कृपया मेरी तरह, आपके कॉन्टैक्ट लिस्ट के सभी लोगों को भी फॉरवर्ड करें। धन्यवाद, आपका दिन शुभ हो।

My Introduction: Kalpesh Sharma, Maninagar, Ahmedabad.
My Profile: https://www.linkedin.com/in/kalpeshsharmaofficial
My Expertise: Technical Intelligence, Content Writing, Communication, Public Speaking, Cyber Security, Research & Digital Marketing.

Comments

    • The Kalpesh Sharma

      I have sent this suggestion link to Honorable Mr. Prime Minister and all VVIPs of India.

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